लफ्ज़, अल्फाज़, कागज़ और किताब, कहाँ कहाँ नहीं रखता मैं तेरी यादों का हिसाब

हम मोहब्बत मिजाज लोगों की..! नफरतें ला-इलाज होती हैं..!!

तुम्हारा एक पल साथ खरीदने के लिए... थोड़ी-थोड़ी ज़िन्दगी रोज़ बेचते हैं हम...

अकेले चलकर बादशाह बना हूँ मैं यहां धोखा साथ चलने वाले ही देते है

वजह पूछने का मोक़ा ही नहीं मिला, वो लेहजा बदलते गये और हम अजनबी होते गये...

रात भर जलता रहा ये दिल उसकी याद में समझ नही आता दर्द प्यार करने से होता है या याद करने से .

मेरी मोहब्बत की हद न तय कर पाओगे तुम अपनी साँसो से भी ज्यादा मोहब्बत करते है तुमसे