Sawan Somvar Vrat Katha 2022 – सावन सोमवार व्रत की कहानी

Sawan Somvar Vrat Katha 2022 नमस्कार आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। हमारे वेबसाइट पर आज सुनते ही भगवान शिव और माता पार्वती की एक कहानी Sawan Somvar.

Sawan Somvar

Sawan Somvar Vrat Katha

किसी गांव में एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी और बेटी राजू के साथ रहता था। उस ब्राह्मण को जो भी भिक्षा मिलती या पूजा पाठ करके वो जोभी कमाता उससे वो अपने परिवार का भरण पोषण करता था।

एक दिन ब्राह्मणी ने कहा, देखो जी मुझे अपनी कोई चिन्ता नहीं है। मैं तो भूख-प्यास सहन कर सकती हूँ पर राजू का भूखा रहना मुझसे सहन नहीं होता। ब्राह्मण बोला, तुम ठीक कह रही हो। तुम्हारी भावनाओं को मैं समझता हूँ, लेकिन मैं अपने भाग्य को नहीं बदल सकता। लगता है हमारे भाग्य में निर्धन रहना ही लिखा है। कितनी ही कोशिश का लू पर कमा नहीं पाता।

ब्राह्मणी बोली भाग्य के भरोसे रहना ठीक नहीं। मेहनत करके हमें अपना भाग्य बदलना चाहिए। आपको यहां से दूर शहर जाकर कमाना चाहिए और देखना भगवान भोलेनाथ की कृपा से हमारा भाग्य जरूर बदल जाएगा। ब्राह्मण बोला तुम कह तो ठीक कही हो पर में क्या काम करूंगा।

मुझे तो पूजा पाठ के अलावा कोई काम आता ही नहीं। ब्राह्मणी ने कहा तो ठीक है ना तुम शहर जाकर पूजा पाठ करो। वहां अच्छे पैसे मिलेंगे और क्या पता हमारे दिन बदल जाएं। अपनी पत्नी की सलाह मानकर ब्राह्मण दूसरे दिन नगर की ओर चल पड़ा पर नगर में उसे कोई काम नहीं मिला। ब्राह्मण सोचने लगा अब क्या होता यहां भी तो कोई काम नहीं मिल रहा है। लगता है यहां के लोग पूरी तरह नास्तिक बन चुके हैं।

इससे तो मैं गांव में ही अच्छा था और जब शहर में भी उसे काम नहीं मिलता तो वो अपने गांव लौटकर वापस आ जाता है और पहले की तरह पूजा पाठ करके और भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करने लगता है। एक दिन जब ब्राह्मण भिक्षा मांगकर लौट रहा था। तब उधर से भगवान शिव और माता पार्वती जा रहे थे। माता पार्वती ने गरीब ब्राह्मण को देखकर कहा।

आप इस निर्धन ब्राह्मण को देख रहे है स्वामी, हां देख रहा हूं। यह बुहत निर्धन और दुखी है। स्वामी ये आपका भक्त है और आप इसके दुख को दूर कर दीजिए। मुझसे इसका दुख देखा नहीं जाता। शिव जी ने कहा देखो ये मृत्युलोक है। यहां पर हर प्राणी किसी न किसी दुख से दुखी है और सभी अपने कर्मों का फल फूल रही है। पार्वती जी ने कहा वह मुझे नहीं पता आपको इस निर्धन मन को धनवान बनाना सीखो का शिव जी ने कहा, ये भाग्य ही है और इसके भाग्य में दुख और गरीबी दोनों ही हैं। लेकिन पार्वती जी कहां मानने वाली थी वो जिद पर अड़ी रहीं और अंत में हारकर शिव जी को उनकी बात माननी पड़ी।

शिव जी ने कहा ठीक है, यह कितना भाग्यहीन है तुम खुद ही देख लो। जहा से भी ब्राह्मण जा रहा था। वहां रास्ते में भगवान शिव ने सोने की एक ईट रख दी इधर ब्राह्मण ने सोचा आज देखता हूं कि आखे बंद करके में कितनी दूर तक चल सकता हूं और ब्राह्मण आँखें बंद करके चलने लगा और सोने की सीट के करीब से होता हुआ वो आगे निकल गया।

भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा, मैने तुम्हें कहा था ना कि यह ब्राह्मण भाग्यहीन है ये कभी धन प्राप्त करके नहीं सकता और इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती वहां से कैलाश लौट गए। लेकिन अब भी पार्वती जी उस ब्राह्मण के बारे में ही सोच रही थीं। पार्वती जी बोलीं स्वामी ब्राह्मण भाग्यहीन है, लेकिन उसके परिवार में तो तीन लोग हैं। आप उनमें से किसी एक को भी अगर धनवान बना दो तो उन तीनों की गरीबी दूर हो जाएगी। आप ऐसा कीजिए कि उन तीनों को एक एक वर दे दीजिए। मुझे विश्वास है कि वो लोग धन का ही वर मांगेंगे और इस तरह धनवान हो जाएंगे।

भगवान शिव ने कहा ठीक है प्रिये तुम जैसा चाहती हो, वैसा ही होगा और जब ब्राह्मण ब्राह्मणी भगवान शिव की पूजा कर रहे थे तो भगवान शिव स्वयं प्रकट हो गए और भगवान शिव को साक्षात रूप में देखकर ब्राह्मण ब्राह्मणी आत्मविभोर होकर उनके पैरों में गिर पड़े। भगवान शिव बोले, मैं तुम तीनों को आज एक-एक वर देना चाहता हूं। तुम अपनी इच्छा अनुसार कोई भी वर मांग सकते हो।

भगवन शिव के ऐसा करते ही ब्राह्मणी बहुत उतावली होकर बोली प्रभु पहले मुझे वर दीजिए। भगवान शिव ने कहा मांगो क्या मांगना चाहती हूं। ब्राह्मणी ने कहा, मुझे इस दुनिया की सबसे अधिक खूबसूरत और जवान औरत बना दीजिए और ऐसी सुंदरता और जवानी दीजिए कि मेरे मरते दम तक मेरी जवानी और सुंदरता कायम रहे। भगवान शिव मुस्कुराते हुए बोले तथास्तु और अगले ही पल ब्राह्मणी एक जवान और सुन्दर औरत के रूप में बदल गई। उसकी सुंदरता जैसा कोई और नहीं था।

उसी समय एक जमींदार का पुत्र घोड़े पर जा रहा था और उस सुंदर औरत को देखकर जो उस पर मुग्ध हो गया और उससे शादी करने के लिए जो उसे अपने घोड़े पर जबरदस्ती उठा कर ले गया। यह देख कर ब्राह्मण रोने लगा। प्रभु मेरी पत्नी कहां चली गई। अब क्या होगा। भगवान शिव ब्राह्मण को सांत्वना देते हुए बोले तुम रो मत तो मुझसे कोई और श्रेष्ठ वर मांग सकते हो। जो भी तुम मांगो के तो तुम्हें तुरंत मिल जाएगा। ब्राह्मण ने कहा, मुझे तो बस यही वर चाहिए कि मेरी पत्नी अभी के अभी वापस आ जाए। इसके सिवा और कुछ नहीं चाहिए।

भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा, तथास्तु और तभी ब्राह्मणी वहां आ गई। अपनी पत्नी को देखकर ब्राह्मण बहुत खुश हो गया। अब भगवान शिव ने उनके पुत्र से पूछा कि तुम बताओ तुम्हें क्या चाहिए। उनके पुत्र ने बहुत सोचा और बोला भगवान मुझे कुछ और नहीं चाहिए। मुझे तो बस यही चाहिए कि मेरी मां पहले जैसी हो जाए। जिससे ऐसा दोबारा न हो सके। 

भगवान शिव बोले, तथास्तु। और अगले ही पल ब्राह्मणी जैसा पहले थी वैसी ही हो गई और अब तो फिर से करीब रह गई। और भगवान शिव भी वहां से चले गए और उन सभी की मूर्खता पार्वती जी देख रही थीं और वो ये सब देखकर बहुत निराश हुईं क्योंकि अब वो उनकी गरीबी दूर नहीं कर सकती थी।

निष्कर्ष :-

Shravan Somwar Vrat Katha Hindi दोस्तो भाग्य का लिखा हुआ बदला नहीं जा सकता और भाग्य हमारे कर्मों से बनता है। इसीलिए हमेशा अच्छे कर्म ही करने चाहिए। तो आज की कहानी Sawan Somvar आपको कैसी लगी कॉमेंट करके सरकार बताएं। धन्यवाद।

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