महाराष्ट्र में चल रहे सियासी संकट के बीच राज्यपाल का फ्लोर टेस्ट फिर बना चर्चा का विषय || फ्लोर टेस्ट क्या है ???

आप सबको तो पता ही है की पिछले कुछ दिनों से मुंबई में चल रहे राजनीती संकट में राज्यपाल का फ्लोर टेस्ट कराने का निर्णय एक बार फिर बहुत जोर सोर से चर्चा में चल रहा है। मुंबई में राजनीतिक स्थिति अशांत बनी हुई है। मुंबई में शिवसेना से बगावत करने वाले विधायकों ने चार दिन बाद भी अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया है।

आप लोगो की जानकारी के लिए बता दू की शिवसेना के कुछ बागी विधायक 24 जून से गुवाहाटी (असम) के 5-Star होटल रेडिसन बूलू में राज्य के शहरी मामलों के मंत्री एकनाथ शिंदे की पक्छ में रुके हुए है। इसी  बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि उन्हें और भी कई विधायकों का समर्थन मिल रहा है।

मुंबई के राजतिक पार्टी शिवसेना के बागी विधायकों ने एकनाथ शिंदे को पूर्ण रूप से अपना नेता चुनने का वीडियो भी जारी किया है। गुवाहाटी के 5-Star होटल रेडिसन बूलू में इस समय रुके मुंबई के बागी विधायकों ने वहां से जारी वीडियो में किसी भी प्रकार का निर्णय लेने के लिए श्री एकनाथ शिंदे को अधिकृत किया है।

फ्लोर टेस्ट क्या है ???

मेरे प्यारे दोस्तों, फ्लोर टेस्ट चुनाव के परीक्षण के लिये उपयोग में लाया जाने वाला शब्द है। जिसके अंतर्गत यदि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ संदेह होने पर उसे सदन में बहुमत साबित करने के लिये कहा जा सकता है साथ ही साथ गठबंधन सरकार के मामले में मुख्यमंत्री को विश्वास के साथ लोगो के बहुमत को हासिल करने के लिये कहा जा सकता है। स्पष्ट बहुमत के कमी में जब सरकार बनाने के लिये एक से अधिक व्यक्ति अगर अपना दावा कर रहे हों, तो राज्यपाल यह देखने के लिये एक विशेष सन्न बुला सकते हैं कि सरकार बनाने के लिये किसके पास ज्यादे लोगो का विश्वास के साथ बहुमत भी है। अगर कुछ विधायक अनुपस्थित हो सकते हैं या चुनाव  नहीं करने का विकल्प चुन सकते हैं तो ऐसी स्थिति में संख्याओं पर केवल उन विधायकों के आधार पर विचार किया जाता है जो मतदान करने के लिये उस सत्र में उपस्थित थे।

फ्लोर टेस्ट से सम्बंधित राजयपाल के संवैधानिक प्रावधान…

दोस्तों आप सब को बता दू की भारतीय संविधान के अनुच्छेद 774  के अंतर्गत राज्यपाल को राज्य विधानसभा को बुलाने और भंग करने का पूरा-पूरा अधिकार देता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (2) के अंतर्गत राज्यपाल को कैबिनेट की सहायता और सलाह पर विधानसभा को बुलाने और भंग करने की शक्ति प्रदान करता है देखा जाये तो राज्यपाल अपने विवेक का तब प्रयोग कर सकता है जब ऐसा मुख्यमंत्री सलाह प्रदान करता है, जिसका बहुमत दुविधा में हो सकता है।

अनुच्छेद 175 (2) के अनुसार, राज्यपाल सदन का सत्र तैयार कर सकता हैं और यह साबित करने के लिये फ्लोर टेस्ट का आह्वान कर सकता है कि वर्त्तमान में जो भी सरकार है उसके पास विधायकों की पर्याप्त संख्या है या नहीं। हालाँकि, राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार ही इन सभी शक्ति का प्रयोग कर सकता है जिसके अनुसार राज्यपाल, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता बाकि सभी मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करता है।

जब सदन शुरू में होता है, तो अध्यक्ष फ्लोर टेस्ट के लिये नेता को बुला सकता है। लेकिन जब विधानसभा सत्र में नहीं होती है तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 के अंतर्गत राज्यपाल अपनी बाकि सभी शक्तियों का उपयोग करके फ्लोर टेस्ट के लिये बुलाने की अनुमति दे सकता हैं।

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